कैसे करें MATE प्रोग्राम की सीख को कक्षा में रोज़ाना प्रभावी ढंग से लागू
परिचय
स्कूलों में पढ़ाई का दबाव, सोशल मीडिया, अकेलापन और भावनात्मक असुरक्षा आज के किशोरों के लिए आम चुनौतियाँ बन गई हैं ,CBSE और AIIMS दिल्ली का MATE प्रोग्राम (Mind Activation Through Education) किशोर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और वेलनेस को मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है, यह किसी किताब या विषय की तरह नहीं है बल्कि एक mental wellness program है जो स्कूलों के काउंसलरों और वेलनेस टीचर्स को विशेषज्ञ प्रशिक्षण देता है। जो किशोरों की भावनात्मक स्वास्थ्य, रेज़िलिएंस और पीयर कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया एक प्रोग्राम है , इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे करें MATE प्रोग्राम की सीख को कक्षा में रोज़ाना प्रभावी ढंग से लागू l यह प्रोग्राम 'MATE-5' कॉन्सेप्ट पर आधारित है, जिसमें छात्रों को कम से कम 5 सच्चे दोस्त बनाने की सलाह दी जाती है ताकि वे अपनी भावनाओं को खुलकर शेयर कर सकें और तनाव से निपट सकें। AIIMS के मनोचिकित्सा, साइकोलॉजी और कम्युनिकेशन एक्सपर्ट्स ने इसे डेवलप किया है, जो छात्रों में रेजिलिएंस (लचीलापन), कोपिंग स्ट्रैटजीज (तनाव प्रबंधन तकनीकें) और पीयर कनेक्टिविटी को बढ़ावा देता है l
Step 1: काउंसलरों और टीचर्स की Intensive Training
AIIMS Delhi के डॉक्टर और mental health experts काउंसलरों को पाँच-दिवसीय गहन प्रशिक्षण देते हैं। इसमें शामिल होता है:
- adolescent psychology
- तनाव पहचानने के तरीके
- anger management
- digital wellness
- emotional literacy
- case handling और crisis management
- student counselling techniques
यह प्रशिक्षण काउंसलर को उस स्तर पर ले जाता है जहाँ वे छात्रों को scientific तरीके से समझ और support कर सकें।
Step 2: MATE-5 Framework को लागू करना
MATE प्रोग्राम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है MATE-5 Framework।
यह पाँच प्रकार के संबंधों पर आधारित है:
1. Self Connection
बच्चों को अपनी भावनाएँ पहचानने और समझने की skill सिखाई जाती है।
2. Family Connection
घर के माहौल को सपोर्टिव बनाना, छोटी गलतफहमियों को कम करना।
3. Peer/Friends Connection
कम से कम 3–5 भरोसेमंद दोस्त बनाना जहाँ बच्चा बिना डर के बात कर सके।
4. Nature Connection
प्रकृति से जुड़ाव, outdoor activities और mindfulness।
5. Social/Community Connection
समुदाय और स्कूल गतिविधियों के माध्यम से belongingness बढ़ाना।
यह framework छात्रों की emotional immunity बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल होता है।
Step 3: Practical Modules, Activities और Case Studies
MATE प्रोग्राम सिर्फ सिद्धांत नहीं है।
इसमें real-life case studies, role-play, communication exercises और behavioural techniques सिखाई जाती हैं।
स्कूल लौटने के बाद काउंसलर इन activities को छोटे समूहों, क्लासरूम सत्रों या wellness periods में लागू करते हैं।
Step 4: Peer Support Circles बनाना
- हर स्कूल में peer-support circles बनाए जाते हैं:
- छोटे 8–10 बच्चों के समूह
- weekly sharing sessions
- problem-solving tasks
- stress-relief activities
यह circles emotional bonding बढ़ाते हैं और छात्रों को भरोसेमंद companions देते हैं।
Step 5: Parent Workshops और Awareness Sessions
- MATE प्रोग्राम parent-awareness पर भी काम करता है:
- घर में संवाद कैसे बेहतर हो
- डिजिटल सीमाएँ कैसे तय करें
- बच्चे की मानसिक स्थिति कैसे पढ़ें
- early warning signs कैसे पहचानें
जब माता-पिता और स्कूल दोनों एक दिशा में काम करते हैं, तब परिणाम बेहतर मिलते हैं।
Step 6: Digital Wellness और Healthy Lifestyle Training
- MATE बच्चों को यह सिखाता है:
- सोशल मीडिया का सही इस्तेमाल
- screen-time control
- अच्छी नींद की आदतें
- basic nutrition awareness
- time management
इन आदतों का लंबे समय तक मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ता है।
और पढ़ें छात्र इमोशनल हेल्थ मॉनिटरिंग ऐप
Step 7: Continuity और Follow-up
- सबसे जरूरी चरण है फॉलो-अप:
- स्कूल में mental health register
- counselling track sheets
- monthly improvement meetings
- emotional-check surveys
- जरूरत पड़ने पर AIIMS experts से online guidance
- यानी यह एक बार का campaign नहीं बल्कि एक निरंतर प्रणाली है।
पेरेंट्स और टीचर्स क्या करें: प्रैक्टिकल, हैंड-ऑन स्टेप्स
- स्कूल से पूछें:
क्या आपके स्कूल में MATE इम्प्लीमेंट हुआ है? काउंसलर से TE-5 सेशन्स की टाइमलाइन और बच्चे के लिए उपयुक्त ग्रुप्स के बारे में बात करें।
- होम–स्कूल ब्रिज बनाएं:
घर पर वही स्किल्स reinforce करें—जैसे “कॉपिंग कार्ड्स” बनाना, “फीलिंग्स चेेक-इन्स” करना और “पीयर टाइम” को पॉज़िटिव बनाना।
- रेड फ्लैग्स पहचानें:
बच्चों में withdrawal, chronic stress, या लगातार low mood दिखे तो काउंसलर से जल्द संपर्क करें—प्रोग्राम ऐसे केसों में structured सपोर्ट देता है।
- डिजिटल हाइजीन और लिमिट्स:
स्क्रीन टाइम और सोशल मीडिया को वेलनेस-फ्रेंडली बनाएं; TE-5 के पीयर कनेक्टिविटी और इमोशनल रेगुलेशन पिलर के साथ यह हाथ में हाथ देता है।
निष्कर्ष
MATE प्रोग्राम शिक्षा को सिर्फ अकैडमिक के बजाय “माइंड–सेंट्रिक” बनाता है,कैसे करें MATE प्रोग्राम की सीख को कक्षा में रोज़ाना प्रभावी ढंग से लागू l इस लेख आपने जाना,जहाँ बच्चे अपनी भावनाओं को समझते हैं, दोस्तों के साथ हेल्दी रिश्ते बनाते हैं, और चुनौतियों से उबरना सीखते हैं। जिससे छात्र भावनात्मक, मानसिक और सामाजिक स्तर पर मजबूत बनता है। CBSE–AIIMS की साझेदारी और ट्रेन–द–ट्रेनर मॉडल इसे विश्वसनीय और स्केलेबल दोनों बनाता है। यह कदम आने वाले वर्षों में स्कूलों को एक ऐसे सिस्टम में बदल सकता है जहाँ learning के साथ-साथ mental well-being भी प्राथमिकता बन सकते हैं l इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मार्गदर्शन हेतु है l कोर्सेज से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी संबंधित संस्थानों की वेबसाइट पर जाकर अवश्य जांचे l आपको यह लेख कैसा लगा इसके बारे में अपने कमेंट्स लिखें और अपने दोस्तों को शेयर करें l
FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1) Project MATE क्या है और किसने शुरू किया?
उत्तर: Project MATE (Mind Activation Through Education) CBSE और AIIMS Delhi का संयुक्त एडोलेसेंट वेलनेस प्रोग्राम है। इसका लक्ष्य छात्रों में रेज़िलिएंस, कॉपिंग स्किल्स और हेल्दी पीयर कनेक्टिविटी विकसित करना है।
2) TE-5 कॉन्सेप्ट में क्या शामिल है?
उत्तर: TE-5 MATE का कोर फ्रेमवर्क है, जो पाँच प्रमुख आयामों—रेज़िलिएंस, कॉपिंग स्ट्रैटेजीज़, पीयर कनेक्टिविटी, इमोशनल रेगुलेशन और सेंस ऑफ मीनिंग—पर काम करता है। यह फ्रेमवर्क स्कूल काउंसलर्स द्वारा ग्रुप सेशन्स और ऐक्टिविटीज़ में लागू किया जाता है।
3) ट्रेनिंग कहाँ और कैसे होती है?
उत्तर: शुरुआती ऑफलाइन ट्रेनिंग AIIMS Delhi में 26–30 अगस्त 2025 को आयोजित हुई। इसमें CBSE स्कूलों के काउंसलर्स/वेलनेस टीचर्स ने भाग लिया और मास्टर ट्रेनर सर्टिफिकेशन प्राप्त किया, ताकि वे अपने स्कूलों में प्रोग्राम लागू कर सकें।
4) स्कूल और पेरेंट्स के लिए इसके व्यावहारिक लाभ क्या हैं?
उत्तर: स्कूलों को एक स्ट्रक्चर्ड, रिसर्च-ड्रिवन मॉडल मिलता है जिससे काउंसलर्स की क्षमता बढ़ती है; बच्चों में स्ट्रेस मैनेजमेंट और पीयर सपोर्ट बेहतर होता है; और सीखने के आउटकम्स में सुधार देखने को मिलता है। पेरेंट्स घर पर इन स्किल्स को reinforce कर सकते हैं।
5) क्या मेरा स्कूल MATE अपनाए तो अगले स्टेप्स क्या होंगे?
उत्तर: काउंसलर को TE-5 पर ट्रेन किया जाएगा, फिर क्लासरूम वेलनेस सेशन्स, पीयर सर्किल्स और कॉपिंग वर्कशॉप्स शुरू होंगी। प्रोग्रेस मॉनिटरिंग के साथ ज़रूरत पर एडवांस/रिफ्रेशर मॉड्यूल्स भी जोड़े जा सकते हैं।


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